सुरक्षा बलों की तैनाती और डोभाल के दौरे के बाद लोगों में शांति बहाली की उम्‍मीद


नयी दिल्ली : उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के बाद पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के दौरे के बाद विजय पार्क और यमुना विहार इलाके के लोगों में शांति बहाली की उम्मीद जगी है.


रात में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल पहुंचने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के क्षेत्र का दौरा करने के बाद हालात में काफी सुधार आया और बुधवार को हिंसा की किसी तरह की खबर नहीं मिली.


इसके बाद बुधवार शाम में डोभाल के फिर से प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद लोगों में एक भरोसा जगा है. यमुना विहार के सी 12 ब्लॉक में रहने वाले मोहम्मद जाकिर ने कहा, पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों के आने और अजित डोभाल के दौरे के बाद हम लोगों को भरोसा है कि इलाके में शांति लौटेगी और हिंसा फिर नहीं होगी.


उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान भी कॉलोनी में हिंदू मुस्लिम मिलकर दंगाइयों का मुकाबला करने के लिए कंधे से कंधा मिला कर साथ खड़े थे. हम सब मिलकर रात में पहरा दे रहे थे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं होने दी. विजय पार्क की गली नंबर 17 में रहने वाले राकेश जैन ने बताया कि हम लोग यहां हमेशा से साथ रहते आए हैं लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ.


मौहल्ला तो हमारा परिवार है. मुस्लिम समुदाय के लोग हमारे भाई हैं. आधी रात को भी जरूरत पड़ती है तो दोनों समुदायों के लिए एक दूसरे की मदद को हाजिर रहते हैं. उन्होंने कहा कि हम यहां प्यार मुहब्बत से रहते आए हैं और आगे भी रहेंगे. दंगाई इलाके के रहने वाले नहीं है, वे बाहर से आ रहे और हम सब मिलकर उन्हें कॉलोनी में घुसने से रोक रहे हैं.


इसी इलाके में रहने वाले सुहैल मंसूरी ने कहा कि इस इलाके में वह 20 साल से रह रहे हैं. यहां आज तक सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई थी. यह पहली बार है, जब इस तरह से हिंसा हो रही है और हम लोग साथ मिलकर दंगाइयों को खदेड़ रहे हैं.


उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र की न किसी मस्जिद को आंच आयी है और न ही किसी मंदिर को. दोनों धर्मों के धार्मिक स्थल बिल्कुल सुरक्षित हैं. मंसूरी ने कहा, मेरे मुस्लिम से ज्यादा हिंदू दोस्त हैं. हम सब साथ रहते है। नेता सियासत की वजह से हिंसा करा रहे हैं और समुदायों के बीच खाई पैदा कर रहे है.


बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ और मौजपुर में इस कानून के समर्थन में लोग सड़कों पर बैठ गए थे. इसके बाद रविवार को दोनों गुटों के बीच हिंसा हुई थी, जिसने सोमवार को सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया था और हिंसा की चपेट में लगभग पूरा जिला आ गया था.