नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भले ही कटौती हो रही हो और अनुमान लगाया जा रहा हो कि इसका फायदा आने वाले दिनों में मिलेगा लेकिन ऐसा होगा नहीं। माना जा रहा था कि Petrol और Diesel की कीमतों में 3-4 रुपए तक की कटौती होगी लेकिन एसा होता नजर नहीं आ रहा है। दरअसल, सरकार ने Petrol और Diesel पर लगने वाले उत्पाद शुल्क Excise duty की सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद अब पेट्रोल पर अब अधिकतम 18 रुपए प्रति लीटर तो डीजल पर 12 रुपए प्रति लीटर तक का उत्पाद शुल्क Excise duty लिया जा सकता है।
सोमवार को वित्त विधेयक में संशोधन के तहत उत्पाद शुल्क सीमा में बढ़ोतरी की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पेट्रोल व डीजल पर और 8 रुपए तक का उत्पाद शुल्क लगाने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसा होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली गिरावट का फायदा पेट्रोल व डीजल के दाम पर नहीं दिखेगा। गत 14 मार्च को सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इस तीन रुपए की बढ़ोतरी से सरकार को चालू वित्त वर्ष में अतिरिक्त रूप से 40,000 करोड़ रुपए के राजस्व मिलने का अनुमान है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में अगर सरकार पेट्रोल व डीजल पर आठ रुपए तक की और बढ़ोतरी करती है तो कच्चे तेल के वर्तमान मूल्य स्तर को देखते हुए नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक लाख करोड़ तक की रकम मिल सकती है। इस राशि का इस्तेमाल सरकार कोरोना प्रभावित सेक्टर के लिए कर सकती है।
राहत पैकेज के तहत इस बात की चर्चा चल रही है कि असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ श्रमिकों को सरकार पांच-पांच हजार रुपए की सहायता प्रदान कर सकती है। ऐसा करने पर सरकार को दो लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी जिसकी काफी हद तक पूर्ति पेट्रोल व डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर की जा सकती है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेट्रोल व डीजल खरीदने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी।