तेलंगाना के बाद इस राज्य का फैसला, कर्मचारियों की सैलरी में होगी 60 प्रतिशत तक कटौती


देश में कोरोना वायरस का कहर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इससे निपटने के लिए सरकार ने अपनी सारी ताकत झोंक दी है। सरकारी अमला दिन रात काम में लगा हुआ है इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने खजाने का मुंह भी खोल दिया है। इसका असर राज्य सरकारों की माली हालत पर भी दिखाई देने लगा है। सरकार के खजाने पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए राज्यों ने अब एक नया रास्ता निकाला है। राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों की सैलरी में कटौती कर रही हैं। तेलंगाना सरकार ने जहां सीएम मंत्री से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारियों की तनख्वाह में 75 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत की कटौती कर दी है। वहीं अब इस कड़ी में महाराष्ट्र राज्य का नाम भी जुड़ गया है। यहां सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 60 प्रतिशत तक कटौती का निर्णय लिया है।








सीएम, मंत्री के वेतन से 60 फीसदी कटौती


महामारी से निपटने के लिए सरकार द्वारा सैलरी काटने का निर्णय लिया है। मंगलवार को सूबे के उप मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री अजित पवार ने बताया कि वर्तमान हालातों से निपटने के लिए सरकारी प्रतिनिधियों, अफसरों और कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सहित सभी विधायक, पार्षद मार्च महीने के वेतन का 60 फीसदी कटौती करवाएंगे।


ग्रेड ए, ग्रेड बी अधिकारियों की सैलरी से इतनी कटौती


सरकार द्वारा तय किया गया है कि ग्रेड ए और ग्रेड बी के अंतर्गत आने वाले अधिकारियों की मार्च महीने की सैलरी में से सरकार द्वारा 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। वहीं ग्रेड सी के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह में से 25 फीसदी कटौती होगी। हालांकि सरकार ने ग्रेड डी के कर्मचारियों को राहत दी है और उनके वेतन में से किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी।


 


राज्य में 7 दिनों से लगा है कर्फ्यू


महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित है। अब तक सूबे में 200 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। मरीजों की संख्या बढ़कर 230 हो चुकी है। 4538 मरीजों को आइसोलेट किया गया था इसमें से 220 मरीज संक्रमित पाए गए थे।


तेलंगाना में भी सैलरी में कटौती


तेलंगाना देश का पहला राज्य था जिसने आर्थिक संकट से निपटने के लिए कर्मचारियों की सैलरी काटने का निर्णय लिया था। सरकार ने राज्य में 75 प्रतिशत तक सैलरी काटना तय किया है। वहां ग्रेड डी के कर्मचारियों के वेतन में से भी 10 फीसदी कटौती का निर्णय लिया गया है।